Friday, 18 September 2009

नास्तिक क्या करे ?


बहुत दिनों बाद अपने ब्लॉग पर आई हूं असल में कुछ सवालों से जूझ रही हूँ आप ही जवाब दीजिये...
जब कुछ बुरा होता है तो लोग कहते हैं भगवन से प्राथना करो सब ठीक हो जायेगा, जब ज़िन्दगी के रास्तों पर सिर्फ अँधेरा दिखता है तो सब समझाते हैं खुदा से दुआ करो ज़िन्दगी रौशनी से भर जायेगी. लोग पूजा करते हैं , मन्नत मांगते हैं, रोजा रखते हैं और अपनी ज़िन्दगी का एक अहम हिस्सा भगवन के नाम पर खर्च कर देते हैं. अपनी ज़िन्दगी में दुःख हो दर्द हो उसका ज़िम्मा भगवान के ऊपर डाल कर खुद बरी हो जाते हैं. अलग अलग धर्म के अलग अलग तरीके हैं भगवान की कृपा अपने पर बनाये रखने के लिए, कोई पूजा पाठ करता है कोई नमाज़ पढता है कोई चर्च में मोमबत्ती जलाता है तो कोई गुरूद्वारे के चक्कर लगाता है. इतना आसान थोडी ना है ईश्वर को खुश करना. भई कुछ अच्छा हुआ तो कहा जाता है की हमने बड़ी मेहनत की तो उसका फल मिला लेकिन जब कुछ बुरा होता है तो उसका दोष भगवान और नसीब के सर मड देते हैं. सबका तो ठीक हैं पर जब कोई रास्ता ना सूझे, मन बेचैन हो और हिम्मत टूट जाये तो ऐसे में हम नास्तिक क्या करें ??? कहाँ जाएँ किस पर अपनी परेशानियों का बोझ डालें और खुद को नाकामी के एहसास से कैसे आजाद करें ???

30 comments:

  1. प्रार्थना मत कर, मत कर
    मनुज पराजय के स्मारक हैं मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर
    प्रार्थना मत कर, मत कर

    हरिवंश राय बच्चन

    1. इंसान महान है, उसने पहले ईश्वर को बनाया फिर कहा ईश्वर ने इंसान को बनाया है.

    2. ईश्वर ने यह दुनिया बनाई और ऐसी बनाई कि इंसान को मुँह दिखाने के लायक़ नहीं रहा इसीलिए छिपा-छिपा फिरता है.

    मेरा मन हमेशा सवाल पूछता है कि उसके सामने सिर ना झुकाने वाले का अनिष्ट कर देने वाला भगवान पूजने योग्य है? क्या लाखों लोगों को भूख-महामारी से मारने वाला भगवान पूजने के योग्य है? क्या दुनिया भर के करोड़ों बच्चों, औरतों ने ऐसा पाप किया है कि उन्हें ऐसा जीवन और ऐसी मौत देना परमपिता, परमदयालु, पालनहारा कहलाने वाले भगवान की मजबूरी है?

    लेकिन भगवान शायद न सिर्फ़ अहंकारी है जो तुच्छ प्राणी की अनदेखी पर नाराज़ होकर उसे दंडित कर सकता है बल्कि वह स्वार्थी भी है, शायद इसीलिए दुनिया में इतना दुख-दर्द का इंतज़ाम किया है ताकि मेरे जैसे भ्रमित लोग भी उसे याद करते रहें. मगर जो बात समझ से परे है, वह ये कि भक्तों की और बुरी गत बनाता है भगवान. भगवान को न मानने वाले अधिकांश यूरोपियन मौज में हैं. अब वही पिटी हुई बात मत कहिएगा कि भक्तों की परीक्षा लेता है भगवान.

    मनुष्य मे स्वयं इतनी ताक़त है की वह अपने ही दम पर मुश्किलों से पार पा जाए. ऊपर आसमान मे बैठे किसी ईश्वर की कल्पना की कोई ज़रूरत नहीं है.

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  2. ab inconvinienti से पूरी तरह सहमत हूँ।

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  3. क्या सिर्फ़ इंसान होना काफ़ी नहीं है? आस्तीक होना एक गलती है और नास्तिक होना दूसरी गलती। गुणात्मक रूप से दोनों में कोई भेद नहीं है। दोनों के जीवन का का केंद्रबिंदु ईश्वर है-एक ईश्वर की ओर जाने में उत्सुक है, दूसरा ईश्वर से दूर जाने में उत्सुक है। एक ईश्वर की clockwise परिक्रमा कर रहा है, दूसरा anti-clockwise, इसलिये दिखते तो वे एक दूजे के विपरीत हैं पर दोनों के परिक्रमा के केंद्र में ईश्वर ही है।

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  4. उजाला-अंधेरा , धूप-छांव , अंधकार-प्रकाश , सुख-दुख , प्रकृति में हर जगह इन सबका गहरा नाता है .. एक के बिना दूसरा महत्‍वहीन है .. इसलिए हिम्‍मत और धैर्य बनाए रखना सबसे आवश्‍यक होता है .. समय बहुत परिवर्तनशील है !!

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  5. मां से बात कीजिये... या फिर दुनिया के सबसे संघर्षशील इंसान से जिसमे जिजीविषा कूट-कूट का भरी हुई है... उनके पास कुछ देर बैठकर ही मन हल्का हो जायेगा... एक सुकून मिलेगा.... मैं ऐसे में अपने पिता जी के पास चुपचाप नीचे बैठ जाता हूँ....

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  6. I am an atheist.. I feel that meri nakamiyan bhi meri hai... I am so possessive about my failures..

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  7. अजी ज्यादा कुछ नही करना है बस आपका ब्लाग खोलें, PC के स्पीकर का वोल्यूम बढा लें और
    आपके पाडकास्ट में "ये हौसला" आंख बंद कर के लगातार सुनें

    प्रणाम

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  8. Kuchh bhee karne kee zururat naheen hai, koi achhe se motivational novel padhenge, apne ajeej-kareeb logon se baaten karenge, khud kee pareshaani ko khud hee khatm karne kee koshish karenge... ham naastikon kee sabse achhee baat ye hai ki ham har cheez kee credit khud hee lete hain, be it a victory or a defeat...

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  9. FAUZIYA....APNE BAdE HI BHAVUVKATA SE IS MUDDE KO Uthaayaa hai.dekhiye jahan ek bahut badee jamaat bhagvaan me vishvaas karti hai, khooda yaa bhagvaan dar pr jaane vaalon or unse apnee murad manvaane vaalon ki ek bahut badee phauj hai vastav me vo kamjor log hain jinme apni pareshani or viphlataun se khood ladne yaa unka samna karne ki takat na ke baaraabar hoti hai......
    vahin nastik hona or us shakti ko nakarna ek himmat kaa kaam hai...isase jydaa apne aaspas vaalon ke savalon ke samane bhi thike rahna or nastik bane rahan bahut hi himmt or takat kaa kaam hai to hamme itni himmt bhi honi chahiye ki ham in andhi-tuphanon ka samna khood kar saken...apne dam pr.....
    iasi halat me ek nastik kya kare....ka thik thik javab to nahi de sakta bt agar mai hota to aphsos karta...jee bhar ke ro leta...isse mera man halka hotaa hai....or us pareshani se bahar aane ke liye vyast rahane ki koshish karta.....bas

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  10. .
    .
    .
    "पर जब कोई रास्ता ना सूझे, मन बेचैन हो और हिम्मत टूट जाये तो ऐसे में हम नास्तिक क्या करें ??? कहाँ जाएँ किस पर अपनी परेशानियों का बोझ डालें और खुद को नाकामी के एहसास से कैसे आजाद करें ???"

    फौजिया,
    जब ऐसा हो तो कुछ समय के लिये आराम करो, अपने शौक को समय दो,दोस्तों की राय लो व फिर दोबारा से रास्ता ढूंढो। यह भी ध्यान रखो कि आस्तिकों को भी रास्ता सुझाने के लिये ईश्वर नहीं आता!

    प्रवीण शाह
    हाँ, मैं सेक्युलर हूँ।

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  11. आपके विचार प्रभाव छोड़ जाते हैं इसमें कोई संदेह नहीं है |
    इस आलेख के माध्यम से अपने जिस विषय-वस्तु और भावना को रखा है वो हर इंसान के साथ घटित होता है |
    आपने सही कहा है कि लोग मुसीबत के समय ही अपने अराध्य को याद करते हैं | या इसे ऐसे भी कहा जा सकता है "डर, लोलुपता और वासनाओं में सनी हुई भक्ती" |
    और हम जैसों के लिए ऐसे समय में आत्मबल काम आता है जिसे वात्शल्य और भी सशक्त बना देता है |

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  12. aur kuchh na ho to is post ko hi padh leN :-


    http://samwaadghar.blogspot.com/2009/09/blog-post_16.html

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  13. अतिमहत्वाकांक्षा अपने को सबसे आगे देखने की की फितरत कभी कभी इन्सान को ऐसे दोराहे पर ला कर खडा कर देती है मन को शांत करें और संगीता दीदी की बातों को घ्यान से देखें.


    आपका हमवतन भाई ..गुफरान (अवध पीपुल्स फोरम फैजाबाद),

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  14. यह ईश्वर को नहीं अपने आप को शान्ति देने के तरीके हैं।
    नास्तिकों के पास भी अच्छे दोस्त होते हैं। दुख, चिन्ता साझा करने से कम होती है।
    क्या हो गया? क्या रेडियो जॉकी का कार्य समाप्त हो गया या फिर पुरुष मित्र ने धोका दे दिया? घबराइये नहीं सब ठीक होगा।

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  15. dear fauziya, jab apko kuchh samajh na aaye to waqt par chhod diya kro jab ham par bura time aata hai to ye smjha kro k uske peechhe achha waqt bhi hamara intizar kar rha hai.

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  16. 1. आप आस्तिक या नास्तिक के लफड़े में ना पड़ें. इंसान ने अपने को तसल्ली देने के लिए ये छद्म लबादा ओढ़ रखा है
    2. बस वो काम करें जो अच्छा लगता हो. जैसे आप रेडियो जॉकी हो तो बात करों ना, आपके दो अच्छे अल्फाज किसी को दो पल की खुशियां दे सकते हैं तो इससे बड़ी इबादत कोई नहीं और आपसे बड़ा कोई आस्तिक नहीं. रोजा और व्रत रखना और ऊपर वाले से एक्सपेक्ट करना कमजोर लोगों का काम है. नवरात्र के बाद नॉनवेज पर कुत्तों की तरह टूटते लोग, रोजा खोलने के बाद भुख्खड़ों की तरह खाकर मेदा खराब करने वाले लोगों से बेहतर तो वो नास्तिक जो चुपचाप समभाव से काम करते हैं . आपके पास क्या करूं , कहां जाऊं यह सोचने के वक्त ही नहीं होना चाहिए. व्यस्त रहें, मस्त रहें. आपको बीता हर लम्हा मस्त लगेगा
    3. अपनी फीलिंग्स शेयर करे लेकिन सबसे नहीं

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  17. ऐसे में आप आँखें बंद करें और अपना सम्पूरण आत्मविश्वास समेटें. इसके बाद अपनी पिछली सबसे निकट कामयाबी को याद करें. फिर अपने आप को बताएं जब उस परेशानी से आपने पार पा लिया था तो यह क्या है. परेशानियाँ आती ही इसलिए हैं कि आप अपने होंसले को परख सकें.
    मेरे ब्लॉग (meridayari.blogspot.com) पर भी आयें

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  18. antaraatma kee aawaz hamesha sahee marg darshan karatee hai.bas isko suniye sab sahee ho jaega .

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  19. ab inconvinienti से पूरी तरह सहमत हूँ।

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  20. fauzia ji ,

    ye hamari dharna hai aur hame sikhaya gaya hai ki hum ishwar/ khuda ke saath aise hi bartaav kare.. in fact wo to hamesha hi apne saath hai .. acha -bura jo bhi hota hai , sab kuch uski marzi hai ... wo hi paalanhaar hai .. ye hamara ghamand hota hai ki , hum uske acche ko apni uplabdi kahte hai ..aur uske bure ko uski karni ...

    just live happily and if happiness is not around [ happiness is a state of mind ] ... please go to mummy .. she is the GOD for her child .

    waise aapne bahut acha likha hai .

    badhai kabul kare..

    regards

    vijay
    www.poemsofvijay.blogspot.com

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  21. एब इनकेन्टिविटी जी सहमत हूं, पर आस्था का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि व्यक्ति अपने ईश के सहारे तनावमुक्त हो जाता है। यही एक ऐसा पक्ष है, जिसके कारण ईश्वरवादियों की संख्या भारत में ज्यादा है।
    मैं किसी ईश्वरीय सत्ता को नहीं मानता। और मेरा मानना है कि मनुष्य परिस्थितियों का दास है। हम जिस परिस्थिति में फंस जाते हैं, उसके अनुरूप कार्य करने के लिए मजबूर होते हैं। उससे बेहतर करना न तो हमारे वश में होता है और न ही हम कर सकते हैं।
    जहां तक नाकामी के दलदल से निकलने की बात है, हम बस इतना ही सोच सकते हैं कि आगे हम इससे बेहतर कोशिश करेंगे, जिससे ऐसी स्थितियां हमारे सामने न आएं। यही सोच आपको शक्ति देगी और आपको चिंता के दलदल से बाहर भी निकालेगी।
    जाकिर अली रजनीश
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  22. This comment has been removed by the author.

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  23. नास्तिक क्या करें?
    या खुदा, ये भी हमें ही बताना होगा ?
    फिर भी सवाल उठा है कि -नास्तिक क्या करें ?
    ऐसा भी कर सकते हैं, सब गवर्मेन्ट के पास जायें,
    मंदिर में भजन, मस्जिद में अजान, गुरुद्वारा में गुरवाणी, और च्रर्च में होने वाली प्रेयर के खिलाफ अपील करें----
    कहें---
    ''इनसे हमारी नास्तिकवाद की भावनायें आहत होती हैं''
    शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

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  24. आपकी बेचैनी लाजमी है.और आपके सवाल सच्चे है.

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  25. भगवान/अल्लाह तो है,,, हम है या नहीं... ये प्रश्न का विषय हो सकता है.

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  26. kya sanyog hai aapki tarah main bhi naastik hun... is post ke jawaab mein v mere paas do post hai...
    http://kucchbaat.blogspot.com/2009/09/blog-post.html
    http://kucchbaat.blogspot.com/2009/11/blog-post_24.html

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  27. meree poem bahaar padana shayad kuch jawab mile.......
    vaise kharab samay me allah kya kiya?poochane wala nastik kanha hua..?

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  28. aapne jo lekh usko badi gahrai se adhyyan se padha aur baki cirtics ke comments ko dekha har shakhsh ne apni baton ko apne tareeke se bhar poor koshish ki aur maanyaab bhi hue ..hamara maanna hai insaan jaisa karta hai waisa paata hai ...upar waala hamesha har ek ke saath hai bas baat hai apni niyat ki ..aap imaandari se ya beimaani se zindagi basar
    karna chahte hai ... jaisa ki aapne likha hai insaan sirf sukh dukh me hi Allah , Bhagwaan , God ko yaad karta hai kyuki aajka insaan selfish hai , hirs ne hume charo traf se gher liya ..yehi wajah hai sabhi ke nazariye lagbhag ek hote ja rahe hai ... mera apna maanna hai agar aap hamesha ibadat gaar , madadgaar , rahguzaar, vagairah banege ya rahenge inshaAllah hum pure fakhr ke saath kah sakte hai kabhi bhi aapko aise alfaaz sukh dukh , aaistik naastik alfaaz aapke charo traf bhatke ge nahi ... bas agar aap hamesha se ibadatguzaar ban jaaye ...jo bhi kisi relegion ka maanne wala ho ... so fauziya ji ummeed karte hai aapko hamari kuch baate samajh agayi hongi aur inshaAllah aap yeh cheezein pahle se bhi jaante honge aur follow bhi karte honge...Aameen
    best regards
    aleem azmi

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  29. ईश्वर
    प्रायः आकर
    मुझ पर प्रश्न दागता

    मैं उसके प्रश्नों के सामने
    सिर झुका लेता

    ...और मैं महसूस करता कि
    ईश्वर कैसे गर्व से फूल जाता

    और इस तरह उसका ईश्वरत्व कायम रह जाता!

    एक दिन
    ईश्वर के जाने के बाद
    मुझे लगा कि मेरी गर्दन
    सिर झुकाते-झुकाते दुखने लगी है

    मुझे लगने लगा कि
    एक जिंदा आदमी होने के नाते
    मेरी सहनशक्ति जवाब देने लगी है

    सो, इस बार जब ईश्वर आया
    तब उसने प्रश्न किया
    और मैंने उत्तर दिया

    प्रत्युत्तर में
    उसके पास प्रश्न नहीं था

    वह चला गया
    तब से नहीं आया

    शायद मैंने उसका ईश्वरत्व भंग कर दिया था!!!

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  30. मोहतरमा फ़ौज़िया रियाज़ साहिबा
    आदाब !

    बहुत सारी टेब्स में आपकी कई पोस्ट्स खोल रखी हैं …
    एक एक करके पढ़ रहा हूं और
    बार बार मन से आवाज़ आ रही है वाह ! वाह !! वाह !!!

    आपके लिए
    राम नहीं ,ईसा नहीं , नहीं बड़ा रहमान !
    सच मानें सबसे बड़ा होता है इंसान !!


    समय निकाल कर यहां भी पढ़ लीजिएगा …
    ईश्वर अल्लाह एक हैं!

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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