Monday, 9 March 2009

Delhi to Karnal....

कभी कभी लगता है नींद से आँख खुलेगी और मैं ख़ुद को अपने कमरे में बिस्तर पर लेती हुई पाऊँगी ,मगर यह होता नही …॥ जिस सच को ख्वाब समझ रही हूँ वो सच कब का ज़िन्दगी का हिस्सा बन चुका है । आँख खुलती है तो पता चलता है आंटी दरवाज़ा खटकता रही हैं और नाश्ते के लिए बुला रही हैं , सुबह जल्दी जल्दी नाश्ता फिर ऑफिस और फिर घर आ कर वही खाली करना …वैसे ज़िन्दगी उतनी बुरी भी नही जितना सोचा था , मुझे अकेलापन काटता नही मैं अकेले बोर नही होती , हर वक्त ज़हन में कुछ न कुछ चलता रहता है बल्कि मैं अपने आप को एन्जॉय करती हूँ …॥ इन्ही बातों का फायेदा है जो मैं अकेले इस शहर में रह रही हूँ हाँ याद तो आती ही है घर की , छोटी मोटी बातों की , हँसी मज़ाक की एक दुसरे की खिंचाई करने की ……यहाँ कोई नही है झगड़ने के लिए , जिद करने के लिए , भाव खाने के लिए , नखरे दिखने के लिए , न तो यहाँ चाय बनाने के लिए एक दुसरे को मनाया जाता है , न ही रात भर हुल्लड़ होती है , न ही सुबह देर तक सोने के लिए जिद की जाती है … ज़िन्दगी अलग है बेहद अलग , खूबसूरत छोटा सा शहर , हरा भरा चौडी सड़कों वाला शहर , रिक्शे par बैठती हूँ और रिक्शेवाला कुछ कहता है तो समझ नही आता ,न ही लोकल दूकान वाले की बात पल्ले पड़ती हैं , उर्दू तहजीब में पली बड़ी हूँ , हरयान्वी सुन कर थोड़ा हैरान और परेशान हो जाती हूँ …
दिल्ली बहुत याद आती है ….उर्दू जुबान और तलफ्फुज घर का दिया हुआ और उसमे पंजाबी और इंग्लिश का तड़का ,मॉल culture का स्टाइल , साउथ दिल्ली का don’t care attitude, महरोली और निजामुद्दीन की दरगाहों का सुकून ,साउथ एक्स की सड़कों की बेफिक्री ……dilli से यह सब मिला है …..यहाँ सब कुछ बेहद शांत है ,किसी को कहीं जाने की जल्दी नही है शायद इसी लिए यहाँ ट्रैफिक जाम भी नही लगते , यहाँ कभी कोई भागता हुआ नही दिखता ,न ही bikes पर couples नज़र आते हैं मगर रात को आसमान में तारे ज़रूर दिखाई देते है ……अजब हाल है साँस यहाँ लेती हूँ पर ज़िन्दगी दिल्ली मैं है

Wednesday, 4 March 2009

Karnal

Kehte hain chhote shehar mein zindagi bahut thehri thehri si rehti hai, sach hai Karnal haryana ka aek chhota sa magar pyara shehar hai, behad khoobsoorat aur shaant, yahan ke logon ke paas aek sukoon bhari zindagi hai magar delhi ki tarah hi sab tez bhaagna chahte hain.....insaan kahin bhi ho aek jaisa hi rehta hai....