Thursday, 20 January 2011

मुस्कुराती गुड़िया


तुम्हें एक
हंसती खिलखिलाती
गुड़िया
चाहिए,
एहसासों से दूर
गोल चेहरे वाली
गुड़िया..
जिसे पटको,
तोड़ो, मरोड़ो
फेंको, बाल नोचो
बनी रहती है
उसके चेहरे की
मुस्कान...
उसके चेहरे की
लाली में,
फर्क नहीं
ख़ुशी, शर्म
या डर का...
चलो आज से
मैं तुम्हारी
मुस्कुराती गुड़िया हूँ.

16 comments:

  1. चलो आज से
    मैं तुम्हारी
    मुस्कुराती गुड़िया हूँ. --ek sundr kavitaa kaa dukhad aur bemaanee ant. ise badal denaa chaahiye .

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  2. बहुत कम शब्दों में गहरी बात, बहुत सुन्दर!

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  3. मुझे मेरी गुड़िया चाहिए,
    मुस्कुराती हुई,

    वो मुस्कुराहट,
    किसी मिल मालिक के,
    मजदूरों की खैरात नहीं,
    उस गुड़िया की खुद की हो

    वो गुड़िया मुस्कुराती चाहिए,
    इसलिए नहीं कि उसकी नियति है,
    इसलिए नहीं कि दूसरे विकल्प नहीं,
    बल्कि इसलिए कि वह खुश है,
    इसलिए कि वह ज़िंदा है

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  4. तुम्हे पता है...
    ख़ुशी हुई मुझे...
    ये पता चला...
    कितने एहसासों को
    दफ़न कर आया हूँ...
    तेरे लिए...
    अब जानकार...
    क्या होगा...
    तुम्हे पता है..
    बाज़ार से ले
    आया हूँ मैं
    एक नयी गुडिया :P

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  5. बहुत अच्छे...और यह उम्मीद कि और कविताएं यहां पढ़ने को मिलेगी आपकी

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  6. me yahi smajahti hun kuch ladke aise hi mante hen ki unhe aisi wife ya gal frnd mile bilkul is gudiya ki tarah

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  7. ant me aakar behad marak !!!
    bahad prbhavshali abhivyakti!

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  8. एहसासों से भरी हुई कविता है ये..
    और इस कविता में,
    मैं गुड़िया की मासूमियत
    भी महसूस कर रहा हूँ....
    "..बनी रहती है
    उसके चेहरे की
    मुस्कान.."..

    likho or khoob likho ....

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  9. पहली बार आपको पढा है..
    सुंदर...

    कीप इट अप

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