Thursday, 27 January 2011

तुम्हारा प्रेम पत्र...


तुम्हारा प्रेम पत्र
जो कभी
पहुंचा नहीं
अपने पते पर,
जो तुमने
लिख कर
कहीं कोने में
डाल दिया,
शायद तुम
वो किस्से
भूला चुके,
मीठी यादों को
गहरी नींद
सुला चुके,
पर उसमे लिखा
हर एक लफ्ज़
जिंदा है
आज भी...
क्यूंकि भावनाएं
जुड़वाँ बच्चों
सी होती है,
शक्लें मिलती हैं
आदतें एक सी है...
सो मेरे प्यारे,
जो तुम
पुराने डिब्बे में
छुपाये बैठे थे
वो तो आज भी
तुम्हारी बातों में
घुला हुआ है,
तुम्हारी नई
मोहब्बत में
मिला हुआ है.

19 comments:

  1. प्यारी कविता है!!

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  2. बहुत खुबसूरत.....तुम्हारा प्रेम पत्र.......

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  3. acchi kavita hai
    khuda kare aap writer bano o apni esi sunder sunder kavita likhey
    aapka naam world famous ho

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  4. Aapne maangi pratikriya
    Samajh nahi aaya kis par duN
    ShabdoN par
    ya BhaawnaaoN par

    kuchh bhaavnaayeN
    ShabdoN se yuN khulti haiN
    ki un par pratikriya dene me
    khud shabdoN ki hi seema khalti hai..

    Shabd Prateek haiN
    BhaavnaaoN ko Padhne me hamaari Akarmanyata ka
    Nahi to shabd ki zarurat hi kya thi??
    Ye har koi jaanta hai..

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  5. प्रेम जुड़वा होता है, जैसा वहाँ, वैसा यहाँ। बड़ा सुन्दर चित्र।

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  6. khoobsurat ...shandaar ..(zafi aftab)

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  7. अच्छा लगता है ये देख कर और पढ़ कर
    की तुम खूब लिख रही हो...ओर सार्थक लिख रही हो..
    'भावनाएं जुड़वाँ बच्चों सी होती है..'
    बधाई.......

    अंत में ..
    वीरेंद्र मिश्र मिश्र की कविता है..
    "पत्र कई आये
    पर जिसको आना था
    वह नहीं आया
    -व्यंग्य किये चली गयी धूप और छाया
    सहन में फिर उतरा पीला सा हाशिया
    साधों पर पाँव धरे चला गया डाकिया
    और रोज जैसा मटमैला दिन गुजरा
    गीत नहीं गाया
    जिसको आना था
    वह नहीं आया ..."

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  8. खूबसूरत ख़याल है फौजिया, लिखती रहिये :)

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  9. behad khoobsurat nazm k liye shukriya!!
    khoob se khoobtar likhti rahen, yahi dua hai.

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  10. "आसान नहीं है प्रेम पत्र लिखना,
    सबसे मुश्किल है सही पते पर पहूंचाना,
    मुश्किल है लिखना अपने प्रेम को,
    अपनी चाहत को कागज प्र उकेड़ना भी, मुश्किल है.

    कई कोशिशें की लेकिन नहीं पाया कोई प्रेम पत्र."
    सुन्दर कविता. बेहतरीन.

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  11. मेरे प्यारे,
    जो तुम
    पुराने डिब्बे में
    छुपाये बैठे थे
    वो तो आज भी
    तुम्हारी बातों में
    घुला हुआ है,
    तुम्हारी नई
    मोहब्बत में
    मिला हुआ है...precise and beautiful...gets the feelng to gain something that was once lost or abandoned...keep writing...good wishes to you

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  12. jab tumhe pata tha...
    kya tha us dibbe mein...
    jo rakha tha maine kone mein...
    to fir kyon thi intezar mein...
    yoon kya rakha hai dosh dene mein...
    bhalai hai sabkuch bhul jaane mein...
    veshak vo mera prem patra hi tha...
    jo rakha tha maine kone mein...
    aaogi tum lene tha isi intezar mein...
    bhul baitha tha tumhara pata...
    mashgul tha ise yaad karne mein...
    par kamvkhat ab aaya hai samajh mein...
    bhalai hai sabkuch bhul jaane mein...

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  13. bahut khub pali raj

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  14. फ़िर सब कुछ क्यों धुंधला हुआ है

    nice lines.... hope i would again visit your blog to read some beautiful lines

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  15. फ़ौज़िया... बहुत ख़ूब लिखा है आपने... अल्लाह आपको उन अल्फ़ाज़ों से नवाज़े जिनकी बरक़त से आपके एहसास में ख़ुशबू महके।
    माशा-अल्लाह!

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