Friday, 28 January 2011

अनकही कहानी...

चलो कहते हैं
एक कहानी,
जो ना मोहताज हो
ज़ोरदार आग़ाज़ की,
ना तयशुदा काग़ज़ी
अंजाम की,
जो
ना ख्वाहिशमंद हो
तड़कते रोमांच की,
ना ज़रूरतमंद हो
धड़कते सुर-ताल की...
कहानी, जो हो
किस्से की तरह,
मोहल्ले की
दादी के सुनाये
किस्से जैसी,
जो हर रोज़
आगे बढ़ता है
नए मोड़ मुड़ता है,
दादी की आवाज़
जैसा,
रस घोले,
उनकी आहट जैसी
सुकूनबख्श हो...
गली के अल्हड़
बच्चे ज़मीन पर
बैठ जिस तरह
सब्र से सुनते हैं,
इसके भी तले
बिछा रहे सब्र
और
बरसता रहे
देर तलक
मासूमियत का अब्र,
कहानी ऊंच-नीच
से नहीं,
उछल-कूद से भरी हो,
ख्वाबों की सड़क
उम्मीदों से पटी हों...
कहानी, जो
रुख बदले तो,
उस पार देखने
की ललक हो,
कहानी, जो
स्कूल से छूटे
बच्चों की हंसी
भरी झलक हो,
कहानी, जो
मेरे कमरे जैसी
बेतरतीब हो,
तेरी ख्वाहिशों
जैसी बेसाख्ता हो,
सिंड्रेला की जूती
जैसी चमकीली हो,
अलादीन की मोहब्बत
जैसी भोली हो...

16 comments:

  1. खाली भूमिका बांध दी... हम तो कहानी सुनने को बेकरार थे!!

    बहुत प्यारी पंक्तियां हैं.

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  2. इन कल्पनाओं की वास्तविकता, काश संभव हो।

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  3. Dil ko chhooti hui kavita hai...Sukun aur Ashaon se bhari hui

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  4. कहानी, जो
    रुख बदले तो,
    उस पार देखने
    की ललक हो,
    कहानी, जो
    स्कूल से छूटे
    बच्चों की हंसी
    भरी झलक हो,
    aisa hi kuch bunna hai!

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  5. कहानी के नाम से उन सभी भावनाओं, खुशियों और एहसासों को यहां दर्ज कर दिया गया जिसकी कहानी को केवल महसूस किया जा सकता है.
    सुन्दर कविता.

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  6. tumhe shabdon ki kamkharchi maloom hai aur yah kavita men kitne purasr dhang se istemal kiya jaye wah bhi.

    keep writing.

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  7. बढिया है। इस कहानी को कहने के लिए वात्‍स्ल्‍य भरी नानी दादी और मासूमियत से भरे कुछ बच्‍चे चाहिए। या दोस्‍त बचपन की तरह। फिर जो भी बयां होगा आपकी इस कहानी की तरह ही होगा।

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  8. खूबसूरत बयां!
    "सच में" पर आने का शुक्रिया!

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  9. चलो जी...अब कहानी शुरू करो... :-)

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  10. मासूमियत का अब्र,
    कहानी ऊंच-नीच
    से नहीं,

    बहुत प्रेरणादायी ...पहली बार आपके ब्लॉग तक आकर इतनी प्यारी रचना पढने का अवसर मिला ...आपका आभार

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  11. आज की थकान कुछ ज्यादा थी ,तभी ये कविता मिली ,हाँ कविता ही है थपकी देते हुए बालों को सहलाते हुए ढेर सारी कहानियां एक साथ सुनाते हुए |मुझे नींद आ रही है फौजिया ,दीवार पर टंगी तस्वीर में दादी की साडी का रंग आज मेरे सपनों का रंग होगा ,शुक्रिया दोस्त

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  12. बहुत अच्छी ख्वाहिशों की कहानी कहना चाहती हो फौजिया. सुन्दर है :)

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  13. कहानी जो कली के जैसे खिले...
    ऐसे जैसे मौसम
    में हवा सरकता सा जा मिले

    so nice ur writings . i am feeling all the lines

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  14. कहानी के भीतर कहानी, कहानी के बाहर कहानी.. कहानी कहानियों से घिरी हुयी.. कहानी कहानियों सी अकेली.. किसी कविता सी कहानी.. न जाने कितनी तो कहानी..

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