Monday, 23 July 2012

अगर हेल्मेट ना पहना होता तो मैं ज़िन्दा ना बचती.



रोमांच वो शब्द है जिसे कहते वक्त आंखों में रौशनी भर जाती है. आमतौर पर पहाड़ों को लांगते हुए, पानी की तहों में सैर करते हुए या हवाओं से रोमांस करते हुए रोमांच को जिया जाता है. कुछ इसी तरह से मैंने भी अपने कुछ दोस्तों के साथ इस शब्द को चखने की ठानी. पिछले दिनों मैं घूमने के लिए लद्दाख जा रही थी. दिल्ली से लद्दाख के इस सफ़र को ना तो बस से तय करना था, ना ही ट्रेन की पटरियों से गुज़रना था. ग्यारह सौ किलोमीटर की दूरी बाइक से नापनी थी. हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से इलाक़े स्वारघाट के पास हमारी बाइक के ब्रेक फ़ेल हुए. एक बेलगाम मगर चालाक बैल की तरह बाइक पहाड़ियों के बीच बने टेढ़े-मेढ़े गोल-मोल रास्ते पर नाचते हुए हमें खाई में पटक कर खुद किनारे बने फ़ेन्स से टकरा कर वहीं गिर गई.  

बाइक चलाने वाला मेरा दोस्त सुरक्षित था लेकिन मुझे काफ़ी चोटें आई. मेरा चेहरा सूज गया, सर सुन हो गया और माथे से लेकर परों तक जिस्म छिल गया. मगर मैं ज़िन्दा थी. इसकी वजह था वो ‘हेल्मेट’ जिसे मैं बचपन में ’हेम्लेट’ कहती और घर पर सब हंस देते. ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है ये वाक्य हज़ारों बार कहा और सुना है पर मौत कितनी बेपरवाह है इस सच से पहली दफ़ा रूबरू हुई. देखने वालों ने बताया कि मैं पेड़ों और पत्थरों से टकराई जिससे मेरा ‘हेम्लेट’ खुल गया, और फिर लगभग घसिटते हुए तीन-चार सौ फ़ूट गहरी खाई में गिरी. मज़े कि बात है कि मुझे उस वक्त जिस्म को महसूस हुआ कोई भी दर्द याद नहीं. अगर मैं मर भी जाती तो मुझे पता ना चलता कि मैं मर गई हूं. कुछ लोगों ने उठा कर ट्रॉली में डाला (हां, डाला…ना कि लिटाया. क्युंकि उस वक्त मैं बस एक सामान थी जिसे मरम्मत की ज़रूरत थी). डॉक्टरी इलाज के बाद अब मैं ठीक हूं. अगर सिर पर लगने वाली पहली या दूसरी चोट के वक्त मेरे सर पर वो सुरक्षा कवच जिसे लोग हेल्मेट और मैं ‘हेम्लेट’ कहती थी ना होता, तो बेशक आज या तो मैं ज़िन्दा ना होती या फिर ज़हनी तवाज़ुन खो चुकी होती.

भारत के लगभग सभी शहरों में दो पहिया वाहनों के पीछे बैठी महिलाओं को हेल्मेट ना पहनने के लिए जुर्माना नहीं देना पड़ता. दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में महिलाओं को ये छूट सिख समुदाये की बदौलत मिली है. असल में सिख महिलाओं को धार्मिक रूप से सिर पर टोपी पहनना मना है. दिल्ली सरकार ने सिख समुदाये की भावनाओं को आहत होने से बचाने के लिए महिलाओं को ये छूट दी है. अब ज़ाहिर सी बात है दो पहिया वाहन पर पीछे सवारी करने वाली औरत से कभी कोई ट्रैफ़िक हवलदार उसका धर्म तो नहीं पूछता. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक साल 2010 में सड़क पर मरने वाले लोगों की तादाद 133,938 थी. हर साल देश भर में हेल्मेट ना पहनने की वजह से हज़ारों लोग घायल होते हैं. जिनमें स्कूटर या बाइक के पीछे बैठने वालों की संख्या अच्छी-खासी होती है.

इस मसले पर हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को तकरीबन दो महीने पहले ऑर्डर दिया था, जिसकी मियाद 25 जून को खत्म हो चुकी है. इसके बावजूद दिल्ली सरकार ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया. बल्कि शीला दीक्षित सरकार और ट्रांस्पोर्ट मिनिस्टर अरविंदर सिंघ ने ‘दिल्ली मोटर वेहिकल्स रूल्स 1993’ के रूल 115(2) का हवाला देकर मामला रफ़ा-दफ़ा करना चाहा. जिसके तहत महिलाओं के लिए हेल्मेट पहना अनिवार्य नहीं है. अब एक बार फिर हाई कॉर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस भेजा है. ज़ाहिर सी बात है सरकार को महिलाओं की सुरक्षा से ज़्यादा अपने वोट बैंक की फ़िक्र है. जहां तक बात धर्म की है तो इसका लचीला होना बेहद ज़रूरी है. सिख धर्म में बाल कटवाना सख्त मना है लेकिन जब किसी सिख व्यक्ति के सिर का ऑपरेशन होना होता है तो उसके बाल काटे जाते हैं. जिस्म के दूसरे हिस्सों के बाल भी मेडिकल ज़रूरत के हिसाब से काटें-छांटें जाते हैं. ऐसे में महिलाओं के हेल्मेट पहनने का विरोध बेमानी लगता है.

हाई कॉर्ट नोटिस दे सकती है, सरकार कानून बना सकती है. लेकिन अपने सिरों  पर हेल्मेट लगाने और कार की सीट-बेल्ट बांधने का काम हमें खुद करना होगा. हो सकता है हम एक-आध बार जुर्माना देकर ट्रैफ़िक पुलिस से बच जाएं. पर जब मौत दस्तक देती है तो जुर्माने में दो-चार सौ रुपये नहीं बल्कि हाथ-पैर या जान भी देनी पड़ जाती है. मेरी सांसों को ‘हेम्लेट’ ने बचाया किसी सरकार ने नहीं. बेहतर होगा हम कानून में बदलाव का इंतज़ार छोड़ें और खुद में बदलाव लाएं. अगर हम खुद अपनी ज़िंदगी की परवाह नहीं करते तो यकीन मानिये सरकार को आपसे कुछ खास लेना-देना नहीं है.

3 comments:

  1. जानकर खुशी हुई कि इतनी खतरनाक दुर्घटना के बाद भी अंतत: आप सुरक्षित हैं। हेलमेट वाकई बहुत जरुरी है। प्राण रक्षक है। मामूली दुर्घटना भी सिर के लिए घातक साबित होती है।

    शीघ्र स्‍वास्‍थ्‍य की शुभकामनाऍं !

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  2. जान कर राहत मिली कि आप ठीक हैं..प्लीज़ अपना ख्याल रखें...
    आशा है आपकी इस बात को सब ध्यान से पढ़ें."हाई कॉर्ट नोटिस दे सकती है, सरकार कानून बना सकती है. लेकिन अपने सिरों पर हेल्मेट लगाने और कार की सीट-बेल्ट बांधने का काम हमें खुद करना होगा. "
    शीघ्र स्वस्थ होने की शुभकामनाएं

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  3. सुरक्षा बहुत जरुरी हैं..लेकिन सुरक्षा का पालन हर जगह होना चाहिए..हर कार्य में..अन्यथा सुरक्षा हटी, दुर्घटना घटी..

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