Monday, 30 March 2015

कॉफ़िन



कई दिन डूबे रहने के बाद
शायद सांस आने ही लगे,
बैठा दिल क्या पता
चलने ही लगे,
बेहोश ख़्वाब जगने ही लगें,
मिटने लगे धुंध
छंटने लगें बादल
शायद किरणें दिखने ही लगें

1 comment:

  1. आशा का दीप जलाये रहना होगा । हम नाउम्मीद हो जायेंगे तो सच मानो .....ये सांसें दोबारा नहीं आ पायेंगी ।

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