Tuesday, 10 May 2011

चल कुछ किताबें जोड़ें...

चल कुछ किताबें जोड़ें

कुछ पन्ने उलटायें

कुछ स्याही बिखेरें

कुछ दवात गिरायें...

चल अब...

कि बहुत हुआ

चूल्हा-चकला, बर्तन-कपड़े

चल कि अब खत्म करे

सिलाई-कढ़ाई, हार-झुमके

सिलाइयां पीछे छोड़े,

क़लम उठायें,

ज़ंजीर उतारें, सिंदूर फेंके

नकाब को मिलकर

आग में झोंके...

पायल अड़े तो उसे भी तोड़ें,

ज़ुल्फ़ फंसे तो उसे भी खोलें,

चल कि अब

बारिश में सड़क किनारे बैठें,

एक छत ढूंढ़ें

एक चादर बिछाये...

कुछ किताबें जोड़ें

कुछ पन्ने उलटायें

कुछ स्याही बिखेरें

कुछ दवात गिरायें...

Friday, 6 May 2011

नहीं चाहिए...

नहीं चाहिए तुम्हारा
सुझाव, दिमाग या हिसाब - किताब
ना ही चाहिए तुम्हारी
समझ, अकल या सही - गलत...
मैं तय कर लूंगी खुद अपने रास्ते,
संभल जाउंगी खुद अपने वास्ते...
गिर पड़ी गर उड़ते- उड़ते
पंख फैलाउंगी फिर हँसते-हँसते...
छलके मोती चुग लूंगी,
दुनिया की ना सुध लूंगी...
जो कमियां मेरी हैं
वो जिम्मेदारियां मेरी हैं...
तुम ना कोशिश करो
सीधी राहें सुझाने की,
ना ही हिम्मत करो
मुझे बचाने की...
तुम चाहते मेरा बचाव हो,
मैं चाहती अपना फैलाव हूँ...
सो
नहीं चाहिए तुम्हारा
सुझाव, दिमाग या हिसाब - किताब

Monday, 2 May 2011

मौत के बाद...



कैसे जीए कैसे मरे
क्या फर्क पड़ा,
इमारतें गिराईं, बुनियादें हिलाईं
दूध-बारूद घोल बच्चों
को पिलाईं...
तुम्हारी शुरुआत ने हमें देखो कहाँ पहुँचाया,
तुम बैठे थे
आलिशान महल में,
हमें नसीब नहीं होती
नए शहर में नयी पनाहगाह..
तो अब जब मिल गया है तुम्हें
परमानेंट ठिकाना,
तो एक विडिओ टेप ज़रूए भिजवाना...
कहाँ गए तुम, कहाँ जा पाए
अपने जिहाद से क्या
जन्नत पा पाए,
खबर देना हमें कि
ऊपर बारूद है क्या,
गर नहीं तो दोज़ख में
तेज़ाब है क्या...
जन्नत पहुंचे
तो बताना हूरे असल में कैसी हैं,
क्या अलिफ़ लैला जैसी
अरबी पौशाक पहनती हैं या
लंबा सा नकाब ओढ़ती हैं...
जिस शरबत का कुरान में जिक्र है
बताना क्या वो शराब है...
बता सको तो ये भी बताना
कि हिटलर का दरवाज़ा कौन सा है,
क्या महात्मा को वहां भी लाठी की जगह
हूरें नसीब हैं,
कहना ये भी कि सद्दाम सुन्नियों की जन्नत में गया
या वहां शियाओं का राज है...
बुद्ध भगवान् हैं या आम इंसान है इसकी खबर देना
ओशो और साईं क्या पडोसी है ...
सबकी खबर लेना...
क्यूंकि
कैसे जीए कैसे मरे
क्या फर्क पड़ा
ज़िन्दगी को पकड़ने की
कोशिश करते हुए,
तुम भी गए तड़पते हुए
जैसे सभी गए मौत से लड़ते हुए...