
समाज,
सुना है आज कल तुम मुझसे बहुत परेशान हो. मेरी दिन ब दिन बढ़ती हिम्मत ने तुम्हारी नीदें उड़ा दी हैं तो सोचा आज आमने सामने बात हो ही जाए. तुम कहाँ से शुरू हुए इसका कुछ सीधा-सीधा पता तो है नहीं मगर कहते हैं जब औरत और मर्द ने साथ रहना शुरू किया तुम्हारी नीव वहीँ पड़ी. तुम्हे मुझसे बहुत सी शिकायतें हैं और वक़्त बेवक्त तुमने इन शिकायतों के चलते मुझ पर अनगिनत वार भी किये हैं. मैं कई साल से तुमसे बात करने की सोच रही थी पर आज ये हिम्मत मुझमे मेरी बहन खुशबू की जीत ने भरी है. तुमने उसे बहुत सताया, खून के आंसू रुलाया यहाँ उसके घर पर पत्थर भी बरसाए. खुशबू का गुनाह इतना था की उसने 2005 में एक मेंगज़ीन को दिए अपने एक interview में कहा था कि "मैं शादी से पूर्व बनाये यौन संबंधों को बुरा नहीं समझती लेकिन इसके लिए सारी सावधानियां बरतनी चाहियें". उसने ये भी कहा "किसी भी पढ़े लिखे इंसान को ये शोभा नहीं देता क़ि वो विर्जिन पत्नी की ख्वाहिश करे". बस फिर क्या था तुम्हे लगा तुम्हारे अस्तित्व पर वार किया गया तो तुमने खुशबू को अपने मन की बात कहने की सज़ा सुना दी. उसके पुतले जलाए और उसे झुकाने के लिए कानूनी दांव पेंच में फंसाया. खुशबू ने जो कहा उसे स्वीकार किया अपनी बात से पलटी नहीं, तुम्हारी धमकियों से डरी नहीं. तुमने मिल कर मुल्क के हर कोने में षड्यंत्र रचा पर खुशबू कोई सफेदपोश नेता नहीं थी जो हालात ख़राब होने पर अपने विचारों से मुकर जाती.
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने खुशबू को बेगुनाह बताते हुए उस पर दर्ज किये सभी 22 मुक़दमे ख़ारिज किये और तुम्हारे मुंह पर ज़ोरदार तमाचा मारा. मैं कुछ कहना चाहूँ तो तुम कहते हो कि मुझे तसलीमा नसरीन की तरह देश निकाला मिलेगा, मुझे जीने नहीं दिया जाएगा तो बेहतर है चुप रहूँ पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने ये साबित कर दिया कि इस देश में रहते हुए भी अपनी बात कही जा सकती है बस ज़रूरत है मजबूती से टिके रहने की. मेरी आज़ादी पर तुम तरह तरह से पहरे लगाते हो, कहते हो मैंने चौखट लांगी तो भेडिये मुझे नोच लेंगे.
समाज, तुम कहते हो की औरत की असल आज़ादी उसके घर में है, उसके परिवार में है क्यूंकि वहीँ वो सुरक्षित है. मेरी आज़ादी क्या है ये मुझे तय करने दो. मेरी असल आज़ादी ये है की आज मैं अपने मन की बात कह सकती हूँ. मुझे शर्म के खोल में लिपटने की ज़रुरत नहीं है, मुझे इज्ज़त के लबादे उढ़ाने की कोशिश करोगे तो उतार फेंकूँगी. मेरे डरने के दिन गए, मेरे सहम कर छुप जाने के दिन लद गए. आज मैं सामने खड़ी हूँ सामना कर सकते हो तो करो. बल का प्रयोग किये बिना हरा सकते हो तो हराओ. औरत आज जीना चाहती है सिर्फ ज़िन्दगी गुज़ारने के दिन ख़त्म होंगे. आज की औरत अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रही है किसी की पत्नी या बेटी कहलाना काफी नहीं है. तुमने मेरी जुबां पर लाख पहरे लगाये पर मैंने ये तोड़ दिए और आज इतना आगे निकल आई हूँ की अब तुम्हारा बस नहीं चलता तो मेरे चरित्र पर उंगली उठाते हो. मेरी तरफ एक ऊँगली उठाते वक़्त तुम भूल जाते हो की बाकी की तीन उंगलियाँ खुद तुम्हारी तरफ उठ रही हैं. खैर अब मैंने इसकी परवाह भी बंद कर दी है, तुम चरित्र के नाम पर सदियों से मुझे कुचल रहे हो. आज जब तुम्हारी चालाकी मेरी समझ में आ गयी तो हड़बड़ा कर उलटी सीधी ताना-कसी कर रहे हो. आज जब मैंने तुम्हे आड़े हाथों लिया तो तिलमिलाहट में मुझे बदचलन कहते हो. कहो जी भर के कहो. पर अब मैं ना तो तुमसे डरूँगी ना ही तुम्हारे घटिया तानो की परवाह करुँगी. आज तुम्हारी इस तिलमिलाहट में मुझे जीत का एहसास हो रहा है. तुम्हारी ये खिसियाहट मुझे सुनहरा कल दिखा रही है जहाँ मैं अपनी शर्तों पर आज़ाद होंगी.
एक निडर लड़की
समाज, तुम कहते हो की औरत की असल आज़ादी उसके घर में है, उसके परिवार में है क्यूंकि वहीँ वो सुरक्षित है. मेरी आज़ादी क्या है ये मुझे तय करने दो. मेरी असल आज़ादी ये है की आज मैं अपने मन की बात कह सकती हूँ. मुझे शर्म के खोल में लिपटने की ज़रुरत नहीं है, मुझे इज्ज़त के लबादे उढ़ाने की कोशिश करोगे तो उतार फेंकूँगी. मेरे डरने के दिन गए, मेरे सहम कर छुप जाने के दिन लद गए. आज मैं सामने खड़ी हूँ सामना कर सकते हो तो करो. बल का प्रयोग किये बिना हरा सकते हो तो हराओ. औरत आज जीना चाहती है सिर्फ ज़िन्दगी गुज़ारने के दिन ख़त्म होंगे. आज की औरत अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रही है किसी की पत्नी या बेटी कहलाना काफी नहीं है. तुमने मेरी जुबां पर लाख पहरे लगाये पर मैंने ये तोड़ दिए और आज इतना आगे निकल आई हूँ की अब तुम्हारा बस नहीं चलता तो मेरे चरित्र पर उंगली उठाते हो. मेरी तरफ एक ऊँगली उठाते वक़्त तुम भूल जाते हो की बाकी की तीन उंगलियाँ खुद तुम्हारी तरफ उठ रही हैं. खैर अब मैंने इसकी परवाह भी बंद कर दी है, तुम चरित्र के नाम पर सदियों से मुझे कुचल रहे हो. आज जब तुम्हारी चालाकी मेरी समझ में आ गयी तो हड़बड़ा कर उलटी सीधी ताना-कसी कर रहे हो. आज जब मैंने तुम्हे आड़े हाथों लिया तो तिलमिलाहट में मुझे बदचलन कहते हो. कहो जी भर के कहो. पर अब मैं ना तो तुमसे डरूँगी ना ही तुम्हारे घटिया तानो की परवाह करुँगी. आज तुम्हारी इस तिलमिलाहट में मुझे जीत का एहसास हो रहा है. तुम्हारी ये खिसियाहट मुझे सुनहरा कल दिखा रही है जहाँ मैं अपनी शर्तों पर आज़ाद होंगी.
एक निडर लड़की




